*चलती कार में हैवानियत, रुद्रपुर फिर शर्मसार कानून-व्यवस्था के दावों के बीच सिडकुल में युवती से दुष्कर्म, सवालों के घेरे में सिस्टम*

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*चलती कार में हैवानियत, रुद्रपुर फिर शर्मसार


कानून-व्यवस्था के दावों के बीच सिडकुल में युवती से दुष्कर्म, सवालों के घेरे में सिस्टम*

रुद्रपुर – उत्तराखंड के औद्योगिक नगरी रुद्रपुर में एक बार फिर इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। सिडकुल क्षेत्र में ड्यूटी के लिए निकली एक युवती के साथ चलती कार में दुष्कर्म का मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि सरकार और पुलिस के तमाम सुरक्षा दावों पर भी करारा तमाचा है। ट्रांजिट कैंप पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी से ऐसे अपराध रुक जाएंगे?

पीड़िता के अनुसार, 25 जनवरी की सुबह वह अपने घर से सिडकुल स्थित फैक्ट्री में काम पर जाने के लिए निकली थी। शिव मंदिर के पास काफी देर तक ऑटो का इंतजार करने के बाद जब कोई साधन नहीं मिला तो वह पैदल रविदास मंदिर से अटरिया रोड की ओर बढ़ी। इसी दौरान कार संख्या UK 06 TA 8429 वहां आकर रुकी। कार सवार दो युवकों ने खुद को मददगार बताते हुए फैक्ट्री तक छोड़ने का झांसा दिया। मजबूरी और भरोसे के बीच युवती उनकी बातों में आ गई, लेकिन यही भरोसा उसके लिए भयावह साबित हुआ।

आरोप है कि दोनों युवक युवती को सिडकुल क्षेत्र में इधर-उधर घुमाते रहे। जब उसने विरोध किया तो एक आरोपी चलती गाड़ी में पीछे की सीट पर आ गया और उसके साथ छेड़छाड़ करते हुए दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इसके बाद आरोपी उसे सिडकुल क्षेत्र में छोड़कर फरार हो गए। सदमे में आई युवती ने हिम्मत जुटाकर ट्रांजिट कैंप थाने पहुंचकर अपनी आपबीती पुलिस को बताई।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज से मिले सुरागों के बाद 27 जनवरी की रात ट्रांजिट कैंप पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने परशुराम चौक से सिडकुल जाने वाली सड़क पर एक फैक्ट्री के पास से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

यह घटना कोई अपवाद नहीं है। रुद्रपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश और देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सरकारें मंचों से महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती हैं, पुलिस गश्त और कानून के सख्त होने की बातें की जाती हैं, लेकिन हकीकत यह है कि काम पर निकली एक युवती भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही। सवाल यह भी है कि औद्योगिक क्षेत्र, जहां हजारों महिलाएं रोजाना काम के लिए जाती हैं, वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आखिर क्यों नहीं हैं?

हर घटना के बाद गिरफ्तारी और प्रेस नोट जारी कर देना क्या काफी है? क्या अपराध होने के बाद की कार्रवाई ही कानून-व्यवस्था कहलाएगी? असली सवाल यह है कि अपराध होने से पहले उसे रोकने की जिम्मेदारी कौन लेगा। जब तक व्यवस्था, सरकार और पुलिस आत्ममंथन नहीं करेंगी, तब तक ऐसे मामलों पर सिर्फ खबरें बनती रहेंगी और समाज शर्मसार होता रहेगा। रुद्रपुर की यह घटना एक चेतावनी है, लेकिन देखना यह है कि इसे गंभीरता से लिया जाएगा या फिर यह भी बाकी खबरों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।