# सरकारी दफ्तर में त्योहार की आड़ में ‘गिफ्ट संस्कृति’! वेतन-भत्ते सरकार से, मेहरबानी किसकी? दलालों की आवाजाही ने खड़े किए गंभीर सवाल
**रुद्रपुर जिला मुख्यालय के एक सरकारी कार्यालय का मामला, अधिकारियों-कर्मचारियों को गिफ्ट देते नजर आए कार्यालय से जुड़े लोग; वीडियो सामने आने के बाद पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल।**
**रुद्रपुर।** त्योहार खुशियां बांटने का अवसर हैं, लेकिन जब सरकारी कार्यालयों में त्योहारों की आड़ में उपहारों का आदान-प्रदान होने लगे और गिफ्ट देने वाले लोग उसी कार्यालय के कामकाज से जुड़े हों तो सवाल उठना स्वाभाविक है। रुद्रपुर जिला मुख्यालय स्थित एक ऐसे सरकारी कार्यालय का मामला सामने आया है, जहां अधिकारियों और कर्मचारियों को कुछ लोग त्योहार के मौके पर गिफ्ट देते नजर आ रहे हैं। इन लोगों का संबंध कथित तौर पर संबंधित कार्यालय के कामकाज से बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे समाचार इंडिया 1 के माध्यम से जनता के सामने रखा जा रहा है।
सवाल यह है कि सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार की ओर से वेतन, उच्च ग्रेड और विभिन्न सुविधाएं मिलती हैं। फिर आखिर ऐसे उपहारों की जरूरत क्यों पड़ती है? यदि उपहार देने वाले लोग उसी विभाग में अपने काम के सिलसिले में आते-जाते हैं तो क्या इस तरह का लेन-देन प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े नहीं करता?
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि संबंधित कार्यालय की कार्यप्रणाली और वहां तैनात अधिकारियों को लेकर पहले से ही चर्चाएं और सवाल उठते रहे हैं। अधिकारियों की तैनाती, बार-बार महत्वपूर्ण कुर्सियों पर वापसी और कथित सांठगांठ को लेकर भी पारदर्शिता की मांग होती रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है, लेकिन सामने आए वीडियो ने एक बार फिर विभागीय कार्यसंस्कृति पर बहस छेड़ दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के केंद्र हैं या फिर ऐसे स्थान जहां काम कराने वालों और अधिकारियों के बीच उपहारों के माध्यम से नजदीकियां बनाई जाती हैं? यदि उपहार महज त्योहार की औपचारिकता हैं तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उपहार देने वाले कौन हैं और सरकारी नियमों के तहत ऐसी गतिविधियों की अनुमति है या नहीं।
अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों पर हैं। क्या इस वीडियो का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच होगी? क्या संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब मांगा जाएगा? जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी कुर्सी पर बैठने वाले लोग किसके प्रति जवाबदेह हैं।
**सरकारी वेतन जनता के टैक्स से मिलता है, फिर सरकारी दफ्तरों में निजी मेहरबानियों की जरूरत क्यों? त्योहारों की मिठास के पीछे यदि किसी तरह के हितों का टकराव छिपा है तो उसकी जांच होनी ही चाहिए। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस वीडियो को सामान्य त्योहार की परंपरा मानकर नजरअंदाज करता है या जवाबदेही तय करने के लिए कदम उठाता है।**




