# हत्या से लेकर गांजा तस्करी और रेलवे तार चोरी तक के आरोप, फिर कैसे बन रहा पासपोर्ट? पुलिस सत्यापन व्यवस्था पर उठे सवाल
**समाचार इंडिया 1 | रुद्रपुर।**
हत्या, एनडीपीएस, रेलवे तार चोरी और बिजली चोरी जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में कथित संलिप्तता के आरोपों ने पासपोर्ट सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधम सिंह नगर को प्रार्थना-पत्र देकर एक व्यक्ति के आपराधिक इतिहास की जांच कराने और नियमानुसार पासपोर्ट प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है।
शिकायत में असगर पुत्र अनवार हुसैन निवासी ग्राम पिपल गांव, थाना भोट, जिला रामपुर (उत्तर प्रदेश), हाल निवासी पहाड़गंज, रुद्रपुर के खिलाफ कई आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 1996-97 में रामपुर के थाना भोट में प्यारे नामक व्यक्ति की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने की जानकारी है। इसके अलावा रुद्रपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित करने और विद्युत चोरी के मुकदमा संख्या 45/2019 का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायत में आरपीएफ थाना रामपुर में रेलवे तार चोरी के मुकदमा संख्या 04/2023 और 28/2023 तथा वर्ष 2016 में सहारनपुर में कैंटर के माध्यम से कथित गांजा सप्लाई के मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन मामलों में दर्ज मुकदमों और न्यायालय के आदेशों में तथ्य सामने आते हैं तो पासपोर्ट सत्यापन के दौरान इनका परीक्षण कैसे हुआ? क्या पुलिस ने संबंधित राज्यों के रिकॉर्ड खंगाले या केवल औपचारिक सत्यापन के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सभी मुकदमों, न्यायिक आदेशों और पासपोर्ट आवेदन में प्रस्तुत दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए। यदि आपराधिक इतिहास छिपाने या पुलिस को गुमराह करने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और जांच पूरी होने तक पासपोर्ट प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
**अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस शिकायत पर कितनी गंभीरता दिखाता है।** क्योंकि मामला केवल एक पासपोर्ट आवेदन का नहीं, बल्कि पुलिस सत्यापन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित पुलिस एवं न्यायालय के अभिलेखों से होना बाकी है।
