शहीदों  को नमन, संघर्ष का संकल्प: पंतनगर में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी श्रद्धांजलि”।

शहीदों  को नमन, संघर्ष का संकल्प: पंतनगर में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी श्रद्धांजलि”।शहीदों  को नमन, संघर्ष का संकल्प: पंतनगर में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी श्रद्धांजलि”।


पंतनगर -पंतनगर में 22 मार्च 2026 को इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और ठेका मजदूर कल्याण समिति द्वारा यूनियन कमेटी हॉल में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा की शुरुआत दो मिनट के मौन और पुष्पांजलि के साथ हुई, जिसमें उपस्थित लोगों ने शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।शहीदों  को नमन, संघर्ष का संकल्प: पंतनगर में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी श्रद्धांजलि”।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि मजदूर वर्ग और मेहनतकश जनता की पूर्ण आजादी के सच्चे पैरोकार थे। उन्होंने सामंतवाद, पूंजीवाद और विदेशी साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष करते हुए समाजवादी व्यवस्था की स्थापना का सपना देखा था। वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह ने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन रखा, जो उनके समाजवादी विचारों और समानता आधारित व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वे धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक एकता के पक्षधर थे और हर प्रकार की कट्टरता के खिलाफ खड़े रहे।शहीदों  को नमन, संघर्ष का संकल्प: पंतनगर में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को दी श्रद्धांजलि”।

सभा में वर्तमान परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई, जिसमें वक्ताओं ने देश और दुनिया में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, श्रमिकों की समस्याओं और वैश्विक स्तर पर साम्राज्यवादी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज भी मेहनतकश वर्ग शोषण और असमानता का सामना कर रहा है और श्रम कानूनों में बदलाव के कारण मजदूरों की स्थिति और कठिन होती जा रही है। निजीकरण, ठेका प्रथा और श्रमिक अधिकारों में कटौती जैसे मुद्दों को उठाते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह सब उस समाजवादी सोच के विपरीत है, जिसके लिए शहीदों ने अपने प्राण न्यौछावर किए थे।

सभा में यह भी कहा गया कि समाज में बढ़ती साम्प्रदायिकता और विभाजनकारी राजनीति मेहनतकश वर्ग की एकता को कमजोर कर रही है, जबकि शहीद भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी हमेशा एकजुट समाज और बराबरी के अधिकारों के पक्षधर रहे। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि शहीदों के अधूरे सपनों को साकार करने के लिए वर्गीय एकता के आधार पर संगठित होकर संघर्ष को आगे बढ़ाना होगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर समाजवादी व्यवस्था और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मनोज, अभिलाख सिंह राशिद, सुभाष, भरत, मानेश्वरी, नविता, धर्मी, मीना, फूलमती, अनिता, राजो, मुन्नी, अर्जुन सिंह, विश्राम, भूपेंद्र, नमन सहित कई लोग मौजूद रहे।