

मुरादाबाद-अमरोहा रूट छोड़ रुड़की के रास्ते दौड़ी संपर्क क्रांति, झरबेड़ा में 2 घंटे रुकी; बेचैन यात्री पूछ रहे—एम्स पहुंच पाएंगे या नहीं?



रुड़की/दिल्ली। देहरादून से नई दिल्ली जाने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का रूट बदले जाने और घंटों की देरी ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। सामान्यतः मुरादाबाद-अमरोहा मार्ग से दिल्ली पहुंचने वाली ट्रेन को रुड़की-सहारनपुर रूट से संचालित किया गया, जिससे यात्रा समय काफी बढ़ गया और यात्रियों के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
यात्रियों के अनुसार ट्रेन झरबेड़ा क्षेत्र में करीब दो घंटे तक खड़ी रही। ट्रेन के सुनसान स्थान पर रुकने से यात्रियों को पीने के पानी, खाने-पीने की सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं के लिए परेशान होना पड़ा। लंबे इंतजार के चलते ट्रेन में मौजूद बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित दिखाई दिए।
सबसे ज्यादा चिंता उन यात्रियों को सता रही है जिन्हें दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में जरूरी कामों, मेडिकल अपॉइंटमेंट और विशेष रूप से एम्स में इलाज के लिए पहुंचना है। कई यात्रियों का कहना है कि उन्होंने महीनों पहले डॉक्टरों से समय लिया था, लेकिन ट्रेन की अनिश्चित देरी के कारण अब उनके समय पर पहुंचने को लेकर संशय पैदा हो गया है।
यात्रियों में यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि आखिर ट्रेन को किस कारण से रूट बदलकर चलाया गया, देरी कितनी और होगी तथा दिल्ली पहुंचने का वास्तविक समय क्या होगा। रेलवे की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से यात्रियों की बेचैनी और बढ़ गई है।
ट्रेन में सफर कर रहे कई लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब किसी ट्रेन का मार्ग बदला जाता है या उसे लंबे समय तक रोका जाता है तो यात्रियों को समय-समय पर स्थिति की जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
रूट परिवर्तन और लगातार बढ़ती देरी ने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को प्रभावित कर दिया है। कोई अपनी फ्लाइट या बस पकड़ने की चिंता में है तो कोई अस्पताल की अपॉइंटमेंट को लेकर परेशान है। ऐसे में संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की यह देरी अब सिर्फ एक रेल संचालन का मामला नहीं रह गई, बल्कि यात्रियों की जरूरतों और समयबद्ध यात्रा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गई है।
झरबेड़ा में दो घंटे के ठहराव और बदले हुए रूट ने यात्रियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या वे समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे, क्या एम्स और अन्य अस्पतालों की अपॉइंटमेंट बच पाएगी, और आखिर रेलवे उनकी परेशानियों का समाधान कब करेगा?

