प्रहलाद पलसिया विवाद: बंगाली समाज का गुस्सा उफान पर, हाई कोर्ट सख्त – सरकार व नेता कटघरे में।

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प्रहलाद पलसिया विवाद: बंगाली समाज का गुस्सा उफान पर, हाई कोर्ट सख्त – सरकार व नेता कटघरे में। रिपोर्ट – महेंद्र पाल मौर्य

उत्तराखंड, उधम सिंह नगर

सितारगंज, 11 नवंबर 2025

 

प्रहलाद पलसिया में बंगाली समाज के परिवारों को उजाड़े जाने का मामला दिनों-दिन तूल पकड़ता जा रहा है। पिछले 10 दिनों से जारी आंदोलन में अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर हलचल तेज हो गई है। हाई कोर्ट ने एसडीएम सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि उजाड़ने की कार्रवाई हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों की अवहेलना मानी जा रही है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आरोप लगाया कि प्रहलाद पलसिया के बंगाली समाज को मालिकाना हक देने का निर्णय उनकी सरकार ने कैबिनेट में पारित किया था, जिसे कैबिनेट ही निरस्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि मत्स्य मंत्री सौरभ बहुगुणा के इशारे पर गलत तरीके से उजाड़ने की कार्रवाई कराई जा रही है। यह बंगाली समाज के अधिकारों पर सीधा हमला है। रावत ने इस मुद्दे पर सौरभ बहुगुणा के साथ उनके पिता व पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भी कटघरे में खड़ा किया और कहा कि बंगाली समाज को और अधिक संगठित होकर जागने की जरूरत है।

 

आंदोलनकारी लोगों ने आरोप लगाया कि 2012 में बंगाली समाज को मालिकाना हक, पुनर्वास और स्थायी बसावट का वादा किया गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी यही मुद्दा दोहराया गया। 2022 में पुनर्वास, पट्टा और योजनाओं में प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 2025 में हालत यह हो गई कि न मालिकाना हक मिला, न पुनर्वास की व्यवस्था, ऊपर से उजाड़ने की कार्रवाई। लोगों का कहना है कि बंगाली समाज को बार-बार चुनावी वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया और बाद में वादे भुला दिए गए।

 

प्रहलाद पलसिया में चल रही उजाड़ने की कार्रवाई का संबंध प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बनाए जा रहे एक्वा पार्क प्रोजेक्ट से बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना के लिए जमीन खाली कराने के नाम पर ग़रीब परिवारों को जबरन हटाया गया, कोई वैकल्पिक पुनर्वास नहीं दिया गया, जबकि कानूनन पुनर्वास के बिना ऐसी कार्रवाई अनुचित और अवैधानिक मानी जाती है।

 

धरना स्थल पर पहुँचे पूर्व विधायक नारायण पाल, वरिष्ठ नेता प्रेमानंद महाजन और बंगाली समाज के विभिन्न पदाधिकारियों ने मौके पर मौजूद परिवारों से वादा किया कि उनकी लड़ाई को विधानसभा से लेकर हाई कोर्ट तक ले जाया जाएगा। लोगों का आरोप यह भी है कि किरण मंडल को समर्थन न देने वाले बंगाली परिवारों को जानबूझकर ठगा जा रहा है और मालिकाना हक की प्रक्रिया रोक दी गई।

 

आंदोलन का तापमान लगातार बढ़ रहा है। 10 दिनों से धरने पर बैठे सैकड़ों लोग ठंड, भूख और असुरक्षा से जूझ रहे हैं। महिलाएँ और बच्चे भी आंदोलन में शामिल हैं। लोगों की एक ही मांग है: उजाड़ना बंद करो – मालिकाना हक और पुनर्वास दो। हाई कोर्ट का नोटिस आने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है, लेकिन आंदोलन अभी थमने वाला नहीं दिख रहा।

तो वही पत्रकारों पर भी अब प्रहलाद पलसिया में उजड़े जा रहे बंगाली समाज के लोगों की खबर चलाने पर तमाम तरीके के आरोप लगने शुरू हो गए। जिसमें प्रहलाद पलसिया में उजड़े जा रहे लोगों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले अनसुनी आवाज के संपादक रूपेश कुमार सिंह पर सांप्रदायिक और सामाजिक उन्माद फैलाने का आरोप लग रहा है, जिस पर उन्होंने कहा पत्रकारों पर तो आरोप लगाते रहते हैं लेकिन हकीकत से वाकिफ़ कराना पत्रकारों की जिम्मेदारी है।