*“रुद्रपुर की लोहड़ी परंपरा के जनक बलवंत अरोड़ा ‘बल्लू’ ने गिनाई इतिहास की गाथा, विधायक शिव अरोड़ा के प्रयासों को बताया शहर की एकता का प्रतीक”*
रुद्रपुर – रुद्रपुर में लोहड़ी उत्सव केवल एक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और साझा परंपराओं का उत्सव बन चुका है। रुद्रपुर पंजाबी महासभा के संस्थापक अध्यक्ष एवं व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष बलवंत अरोड़ा उर्फ बल्लू ने “समाचार इंडिया 1” से लोहड़ी के शुभ अवसर पर विशेष बातचीत में रुद्रपुर में लोहड़ी मेले की ऐतिहासिक शुरुआत और उसकी निरंतरता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
बलवंत अरोड़ा बल्लू ने बताया कि उत्तराखंड राज्य बनने से पूर्व वर्ष 1997–98 के आसपास पहली बार रुद्रपुर में गांधी पार्क में भव्य लोहड़ी मेले का आयोजन किया गया था। उसी समय रुद्रपुर पंजाबी महासभा का गठन हुआ और उन्हें संस्थापक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके नेतृत्व में रुद्रपुर में लोहड़ी मेले की नींव पड़ी, जिसने आगे चलकर शहर की पहचान में एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया।
उन्होंने बताया कि उस पहले आयोजन में गुलशन छाबड़ा, अशोक छाबड़ा, सुरमुख सिंह विर्क, सुरेंद्र रज्जी, बाल किशन मिड्डा, रमेश मिड्डा,शैलेन्द्र ग्रोवर पेप्सी कोला वाले, राकेश डूडेजा, हरीश जल्होत्रा, गुरदीप गाबा राकेश सुखीजा, एडवांस स्टैंड के मालिक सुधीर अरोड़ा, यशपाल घई, प्राण ठक्कर, केवल कृष्ण बत्रा, नरेश शर्मा, संजय जुनेजा, ललित मिगलानी,बत्रा टेक्सटाइल के मालिक, महेंद्र छाबड़ा, महेश छाबड़ा, रमेश अरोरा शक्ति कूलर वाले,रामकिशन खेड़ा पूर्व प्रधान भूरा रानी, सरदार जसपाल सिंह धामीजा जिन्होंने बाद में पंजाबी सभा के अध्यक्ष पद संभाला। ऐसे समर्पित लोगों के द्वारा प्रथम लोहड़ी मेले का आयोजन किया गया। प्रथम लोहड़ी मेले में शैलेन्द्र ग्रोवर ने फ्री में पेप्सी कोला सेंट्रल स्टॉल पर पिलाया। जो उसे वक्त मेले के आकर्षण का केंद्र बना। उस सर्दी में भी उस वक्त लोगों ने 200 क्रेट पेप्सी पी। ऐसी भावना से लोगों ने उसे वक्त लोहड़ी मेले का आयोजन कराया था। उस वक्त मात्र 1900 रुपए इकट्ठा करके उस वक्त लोहड़ी मेला शुरू हुआ था । कोषाध्यक्ष की कमान सुरेंद्र सिंह रज्जी ने संभाली थी। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, विधायक शिव अरोरा के नेतृत्व में इस वर्ष भी लोहड़ी मेले का आयोजन हुआ और जिसमें शहर के अनेक गणमान्य व्यापारियों और समाजसेवियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। उस समय दो दिनों का भव्य मेला आयोजित किया जाता था और “सांझी लोहड़ी” का कार्यक्रम भी विशेष आकर्षण का केंद्र होता था, जिसमें सभी समाजों के लोग मिलकर उत्सव मनाते थे।
बलवंत अरोड़ा बल्लू ने कहा कि तभी से रुद्रपुर शहर में लोहड़ी मेले की परंपरा शुरू हुई और वर्षों से लोग अपने-अपने तरीके से इस पर्व को मनाते आ रहे हैं। आज लोहड़ी रुद्रपुर में पूरे उत्साह, उमंग और भाईचारे के साथ मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि लोहड़ी केवल पंजाबी समाज का पर्व नहीं है, बल्कि यह पूरे हिंदुस्तान का त्योहार है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। लोहड़ी शब्द अपने भीतर आपसी शुभकामनाओं, बुजुर्गों के आशीर्वाद, नई शुरुआत और सामूहिक खुशियों की भावना समेटे हुए है। लोहड़ी मांगी जाती है, दी जाती है और एक-दूसरे को आशीर्वाद स्वरूप समर्पित की जाती है।
चार वर्षों के अंतराल के बाद रुद्रपुर सिटी क्लब में भव्य लोहड़ी मेले के आयोजन को लेकर बलवंत अरोड़ा बल्लू ने क्षेत्रीय विधायक शिव अरोड़ा की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विधायक शिव अरोड़ा ने इस आयोजन को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि एक कार्यकर्ता बनकर, सभी समाजों को जोड़ते हुए संपन्न कराया। पंजाबी सभा के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने विधायक शिव अरोड़ा और रुद्रपुर लोहड़ी मेला समिति का गठन कर लोहड़ी मेले को पुनः सिटी क्लब में आयोजित करने वाले सभी सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार और नमन व्यक्त किया।
बलवंत अरोड़ा बल्लू ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में रुद्रपुर में और भी भव्य एवं ऐतिहासिक लोहड़ी मेले आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के आयोजन में केवल पंजाबी समाज ही नहीं, बल्कि सभी समाजों के लोगों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि लोहड़ी रुद्रपुर की साझा सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। यह मेला रुद्रपुर की एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण है।
अंत में बलवंत अरोड़ा उर्फ बल्लू ने सभी क्षेत्रवासियों को लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज पूरा रुद्रपुर विधायक शिव अरोड़ा के इस प्रयास से प्रसन्न है। सभी समाजों को एक मंच पर लाकर उन्होंने जो कार्य किया है, उसके लिए वे बधाई के पात्र हैं और यह आयोजन रुद्रपुर के सामाजिक इतिहास में एक नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला सिद्ध होगा।
