अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी बचाने’ के आरोपों ने फिर पकड़ा तूल, भाकपा (माले) ने बाटा चौक पर फूंका भाजपा सरकार का पुतला, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग
रुद्रपुर, 27 दिसंबर।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। भाकपा (माले) ने शनिवार को रुद्रपुर के बाटा चौक पर प्रदेश की भाजपा सरकार का पुतला दहन कर आरोप लगाया कि सत्ता के प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए इस जघन्य हत्याकांड की सच्चाई अब तक सामने नहीं आने दी गई। पार्टी ने पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने की मांग दोहराई।
प्रदर्शन के दौरान भाकपा (माले) की नेता अमनदीप कौर ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद से ही यह सवाल लगातार उठता रहा है कि आखिर वह वीआईपी कौन था, जिसके लिए अंकिता पर “स्पेशल सर्विस” देने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अंकिता द्वारा इस दबाव का विरोध किए जाने के बाद उसकी निर्मम हत्या कर दी गई, लेकिन हत्या के दोषियों को सजा मिलने के बावजूद उस वीआईपी की पहचान आज तक उजागर नहीं हो सकी, जो इस पूरे मामले के केंद्र में बताया जाता रहा है।
अमनदीप कौर ने हाल में सामने आए उन कथित ऑडियो क्लिप्स का हवाला दिया, जिन्हें उर्मिला सनावर नामक महिला द्वारा सार्वजनिक किया गया है। इन ऑडियो में ज्वालापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर बताए जा रहे व्यक्ति यह दावा करते सुने जा सकते हैं कि अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम तथा भाजपा के उत्तराखंड संगठन महामंत्री अजय कुमार हैं। ऑडियो में यह भी कहा गया है कि दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ महिला संबंधी कई मामलों की शिकायतें भाजपा हाईकमान तक पहुंच चुकी हैं। इतना ही नहीं, इन कथित बातचीतों में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पार्टी की छवि बचाने के लिए इस मामले में सीबीआई जांच नहीं होने दी।
भाकपा (माले) का कहना है कि ये सभी आरोप अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं, जिनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है। पार्टी नेताओं ने मांग की कि जिन लोगों को इस प्रकरण में वीआईपी बताया जा रहा है, उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन की जांच की जाए, साथ ही सामने आए ऑडियो रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले इस मामले की जांच उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी ने की थी, लेकिन वह भी वीआईपी की पहचान उजागर करने में विफल रही, जिससे राजनीतिक दबाव की आशंका और गहराती है।
भाकपा (माले) नेताओं का आरोप है कि नए तथ्यों के सामने आने के बावजूद भाजपा सरकार और उसके नेता मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि चूंकि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री पर भी सीबीआई जांच रोकने का आरोप लगाया जा रहा है, इसलिए प्रदेश सरकार के खिलाफ पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया है।
इस मौके पर पार्टी नेता ललित मटियाली ने भाजपा पर महिला विरोधी रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में भाजपा नीत सरकार के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचने की घटना और उस पर भाजपा द्वारा किया गया बचाव, उत्तर प्रदेश में बलात्कार के आरोपी भाजपा विधायक को जमानत मिलना तथा उत्तराखंड में अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी को बचाने के प्रयास—ये सभी घटनाएं भाजपा के महिला विरोधी चरित्र को उजागर करती हैं।
पुतला दहन कार्यक्रम में ललित मटियाली, अमनदीप कौर, ज्ञानी सुरेन सिंह, उत्तम दास, अनिता अन्ना, माकपा नेता जागीर सिंह, विजय शर्मा, प्रीति मौर्य, मंजू कश्यप, मोहनस्वरूप सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए और वीआईपी की पहचान सार्वजनिक की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
