उत्तरायणी, मकर संक्रांति एवं घुघुतिया त्यार महोत्सव 2026: शैल परिषद ने भूमि पूजन के साथ तेज की तैयारियां।
रुद्रपुर।
शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले उत्तरायणी, मकर संक्रांति एवं घुघुतिया त्यार महोत्सव 2026 की तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। इसी क्रम में सोमवार, 12 जनवरी को शैल भवन परिसर, गंगापुर रोड स्थित मोदी मैदान के समीप समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत विधिवत भूमि पूजन सम्पन्न हुआ।
बैठक के दौरान आगामी 13 एवं 14 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले दो दिवसीय महोत्सव को लेकर टेंट, प्रकाश व्यवस्था, झूले, साफ-सफाई, सुरक्षा प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई और जिम्मेदारियां तय की गईं।
भूमि पूजन कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. एल.एम. उप्रेती, कार्यक्रम संयोजक दिनेश बम के साथ कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र बोहरा, सतीश ध्यानी, नरेंद्र रावत, जगदीश बिष्ट, दान सिंह मेहरा, राजेश भरड़ा, चंद्र बल्लभ घिल्डियाल, हरिश्चंद्र मिश्रा, विनीत पांडे, पवन रावत सहित महिला सदस्यों में श्रीमती सुधा पटवाल, श्रीमती किरण बोहरा, गीता बिष्ट तथा अन्य पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि उत्तरायणी महोत्सव का आयोजन 13 एवं 14 जनवरी 2026 को प्रातः 11 बजे से सायं 6 बजे तक शैल भवन परिसर में भव्य, पारंपरिक और पूर्णतः पारिवारिक वातावरण में किया जाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि कुमाऊँ और गढ़वाल की लोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं को नई पीढ़ी तक सहेजकर पहुंचाना है।
महोत्सव के पहले दिन 13 जनवरी को उत्तराखंड के सुविख्यात लोक गायक गजेन्द्र राणा, लोक गायिका डॉ. कुसुम भट्ट के साथ विक्रम रावत, जगदीश भट्ट और राजेन्द्र बिष्ट कुमाऊँनी एवं गढ़वाली लोक गीतों की प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। कार्यक्रम का संचालन सूरज रावत करेंगे, जबकि नृत्य निर्देशन की जिम्मेदारी अक्षय राणा, संगीत निर्देशन विमल रावत तथा लय-ताल वादन पवन रावत, पंकज बणई और शिवम शर्मा द्वारा निभाया जाएगा।
दूसरे दिन 14 जनवरी को क्षेत्र के चयनित विद्यालयों के छात्र-छात्राएं देशभक्ति और पर्वतीय संस्कृति से ओतप्रोत लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगे। दोनों ही दिनों में पर्वतीय अंचल की पारंपरिक पहचान माने जाने वाला छोलिया नृत्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
महोत्सव को पूर्णतः पारिवारिक स्वरूप देने के उद्देश्य से आयोजन स्थल पर बच्चों के लिए झूले, पर्वतीय उत्पादों के स्टॉल, पारंपरिक व्यंजन तथा स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। समिति ने इच्छुक संस्थाओं एवं व्यापारियों से स्टॉल, बैनर और प्रचार सामग्री के लिए संपर्क करने की अपील की है। स्टॉल पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
शैल परिषद के पदाधिकारियों ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर उत्तरायणी, मकर संक्रांति एवं घुघुतिया त्यार महोत्सव 2026 को सफल बनाएं और अपनी लोक संस्कृति के संरक्षण में सहभागी बनें।
