सवाल पूछने पर महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, रुद्रपुर के पत्रकारों में रोष

सवाल पूछने पर महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, रुद्रपुर के पत्रकारों में रोष


रुद्रपुर। दिल्ली में 4PM चैनल की महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट का मामला सामने आने के बाद ऊधमसिंह नगर के पत्रकारों में भी रोष है। पत्रकारों ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों का काम सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों को सामने रखना है। यदि सवाल पूछने पर पत्रकारों को ही प्रताड़ना का सामना करना पड़े तो यह स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

बताया गया है कि दोनों महिला पत्रकार दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम को कवर करने पहुंची थीं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी थी। इसी दौरान महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछने का प्रयास किया। आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने दोनों पत्रकारों को रोक लिया और उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार एवं मारपीट की गई।

आरोपों के अनुसार दोनों पत्रकारों को पुलिस वाहन से साकेत थाने ले जाया गया। पत्रकार शाहीन खान ने आरोप लगाया कि पुलिस वाहन और थाने में भी उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। उन्होंने बाद में घटना की जानकारी देते हुए अपने साथ हुई कथित ज्यादती के आरोप लगाए। उनकी सहयोगी नफीसा खान के साथ भी कथित दुर्व्यवहार किए जाने की बात सामने आई है।

इस पूरे मामले ने पत्रकारों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऊधमसिंह नगर के पत्रकारों का कहना है कि पत्रकार किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि अपने पेशेवर दायित्व के तहत सवाल पूछते हैं। किसी कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता या मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

पत्रकारों का कहना है कि आज पत्रकारों को समाचार संकलन के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें दबाव, धमकी और विरोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद वे जनता की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हैं। ऐसे में महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

स्थानीय पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना पत्रकार का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसके पेशे का मूल दायित्व है। यदि पत्रकारों को सवाल पूछने से रोका जाएगा अथवा उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की जाएगी तो इसका सीधा असर स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता पर पड़ेगा।

पत्रकारों ने मांग की कि दिल्ली की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पत्रकारों का कहना है कि यह मामला केवल 4PM चैनल की दो महिला पत्रकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में काम कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय है। पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण में अपना कार्य करने का अधिकार मिलना चाहिए। लोकतंत्र में सवालों को दबाने के बजाय सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।

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