“खबर दिखाई तो कहर बरपाया?” बाजपुर में दलित पत्रकार के साथ कथित बर्बरता,  निर्वस्त्र कर पीटा चमड़े के जूते में पिलाया पानी दलित होने और निष्पक्ष पत्रकारिता की मिली सजा।

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“खबर दिखाई तो कहर बरपाया?” बाजपुर में दलित पत्रकार के साथ कथित बर्बरता,  निर्वस्त्र कर पीटा चमड़े के जूते में पिलाया पानी दलित होने और निष्पक्ष पत्रकारिता की मिली सजा।

रुद्रपुर -उधम सिंह नगर के बाजपुर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसमें स्वयं को निष्पक्ष एवं दलित पत्रकार बताने वाले विमल भारती उर्फ गोल्डी निर्भीक ने बाजपुर पुलिस पर बर्बर अत्याचार, जातीय उत्पीड़न, फर्जी मुकदमा दर्ज करने और कानून के दुरुपयोग के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। यह प्रकरण न केवल प्रेस की स्वतंत्रता बल्कि दलित अधिकारों और मानवाधिकारों से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

विमल भारती, निवासी ग्राम केशोवाला, बाजपुर, का कहना है कि वे पिछले 13-14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और Time TV News, Shri News, A2Z News, India Crime News, Network 10 News तथा HNN 24×7 जैसे चैनलों से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे KNews चैनल तथा अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म “खबरदार उत्तराखंड TV” से संबद्ध रहे हैं। उनका दावा है कि वे लंबे समय से शासन-प्रशासन में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को उजागर करते रहे हैं, जिसके चलते वे सत्ता और सिस्टम की आंख की किरकिरी बन गए थे।

मामले की शुरुआत 11 नवंबर 2025 से बताई जा रही है, जब उन्होंने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बाजपुर पुलिस विभाग में एक ही स्थान पर कुछ चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों की बार-बार हो रही पोस्टिंग को लेकर एक समाचार प्रसारित किया। विमल भारती का आरोप है कि इस खबर के प्रसारण के बाद उन्हें आशंका हो गई थी कि उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसी आशंका के चलते उन्होंने 12 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति, गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री उत्तराखंड, राज्यपाल तथा डीजीपी उत्तराखंड को लिखित सूचना भेजकर संभावित खतरे की आशंका जताई थी और स्पष्ट किया था कि यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है या फर्जी मुकदमा दर्ज किया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की होगी।

उनका आरोप है कि 13 नवंबर 2025 को उनकी आशंका सच साबित हुई। भारी पुलिस बल और पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता नेहा शर्मा जेसीबी मशीन के साथ बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना के उनके घर पहुंचे और अतिक्रमण के नाम पर केवल उनके घर पर ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। विमल भारती का कहना है कि वे स्वयं एक दिन का समय लेकर निर्माण हटाने को तैयार थे, इसके बावजूद अचानक की गई कार्रवाई एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा थी।

घटना के दौरान वे अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना रहे थे। उनका आरोप है कि जैसे ही उन्होंने जेसीबी द्वारा दीवार में आई दरार पर आपत्ति जताई, उसी दौरान मौजूद एसएसआई जसविंदर सिंह ने उनका मोबाइल छीन लिया और उन्हें जबरन जेसीबी के सामने धक्का देकर बाद में आतंकवादी जैसा व्यवहार करते हुए पुलिस वाहन में डालकर कोतवाली बाजपुर ले जाया गया, जबकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था।

कोतवाली में उनके अनुसार पीडब्ल्यूडी की सहायक अभियंता से प्रार्थना पत्र लेकर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 132, 221 और 351(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विमल भारती का आरोप है कि उन्हें धारा 41A का नोटिस दिए बिना शाम के समय पुलिस वाहन से बन्नाखेड़ा चौकी ले जाकर हवालात में बंद किया गया। स्थानीय पत्रकारों द्वारा विरोध किए जाने का भी उन्होंने दावा किया है।

सबसे गंभीर आरोप इसके बाद के घटनाक्रम से जुड़े हैं। विमल भारती के अनुसार उन्हें हवालात से निकालकर रिपोर्टिंग रूम में ले जाया गया, जहां उनसे उनके मोबाइल और जीमेल आईडी का पासवर्ड मांगा गया। उन्होंने इसे निजता का विषय बताते हुए पासवर्ड देने से इनकार किया। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर चौकी परिसर में स्थित एक कक्ष में ले जाकर कई पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें उल्टा लिटाकर पैरों के तलवों पर डंडों से पीटा गया, निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया गया, जाति सूचक गालियां दी गईं और चमड़े के जूते में पानी पिलाकर अपमानित किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनका मोबाइल जबरन अनलॉक कर डाटा कॉपी किया गया और उनके चैनल की पेशेवर आईडी डिलीट कर दी गईं, जिससे उनके वर्षों की पत्रकारिता पर गंभीर आघात पहुंचा है।

घटना के बाद 15 दिसंबर 2025 को उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, डीजीपी उत्तराखंड, गृह सचिव, पुलिस प्राधिकरण हल्द्वानी और आईजी कुमाऊं को शिकायत भेजी। उनका कहना है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 25 दिसंबर 2025 को उन्होंने नैनीताल हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की, जहां से आईजी कुमाऊं को तीन सप्ताह में जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन उनके अनुसार निर्धारित समय से अधिक अवधि बीतने के बावजूद कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई।

8 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा मामले का संज्ञान लेकर डीएम और एसएसपी उधम सिंह नगर को नोटिस जारी किया गया और 24 जनवरी 2026 को दूसरा नोटिस भी भेजा गया, लेकिन विमल भारती का दावा है कि इसके बावजूद अब तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

पूरा मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि आरोप सही हैं तो यह प्रेस की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और दलित अधिकारों पर सीधा हमला माना जाएगा। वहीं यदि पुलिस पक्ष इससे भिन्न है तो निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। विमल भारती ने सामाजिक संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों और मानवाधिकार संस्थाओं से इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर न्याय दिलाने की अपील की है।

यह मामला अब केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि व्यवस्था, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा बनता जा रहा है।

Mahendra Pal