मेट्रोपोलिस में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, धर्म–संस्कार और सामाजिक एकता का बना संदेश केंद्र।

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मेट्रोपोलिस में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, धर्म–संस्कार और सामाजिक एकता का बना संदेश केंद्र

रूद्रपुर। मेट्रोपोलिस आवासीय परिसर में पिछले सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में भव्य समापन हुआ। विश्राम दिवस पर कार्यक्रम में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और व्यास गद्दी पर विराजमान कथा वाचक का माल्यार्पण कर विधिवत सम्मान करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता और मेट्रोपोलिस में बढ़ती धार्मिक चेतना को स्पष्ट रूप से दर्शाया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को मजबूत करने और सकारात्मक सोच को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने मेट्रोपोलिस के निवासियों की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह एक सुव्यवस्थित और आधुनिक आवासीय परिसर के रूप में मेट्रोपोलिस अपनी पहचान बना रहा है उसी तरह यहां धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का निरंतर होना इस क्षेत्र को सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध बना रहा है।

राजकुमार ठुकराल ने आयोजन की सफलता के लिए मेट्रोपोलिस के अध्यक्ष देवेंद्र शाही, विक्रांत फुटेला, सुनील शुक्ला, दिलीप सिंह और रवि सिंह की विशेष प्रशंसा की और कहा कि इनके नेतृत्व और समर्पण के बिना इतना भव्य आयोजन संभव नहीं था। उन्होंने जानदार सिंह, बिहारी लाल चौहान, पुष्पेंद्र राय, हरेंद्र राय, बृजेश तिवारी, संतोष यादव और जीवन सिंह सहित पूरी आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि टीम भावना के साथ किया गया प्रयास ही किसी भी कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाता है।

अपने संबोधन में ठुकराल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को मानसिक शांति मिलती है और भक्ति मार्ग का वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कथा के संदेश और उसके सार को अपने दैनिक जीवन में उतारें ताकि समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की स्थापना हो सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के लिए ऐसे धार्मिक आयोजनों का निरंतर आयोजन अत्यंत आवश्यक है।

कथा के समापन अवसर पर मेट्रोपोलिस परिसर भक्ति संगीत, जयकारों और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मेट्रोपोलिस को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक क्षण