हरिद्वार में कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती: कोर्ट पेशी पर ले जाए जा रहे आरोपी पर सरेआम फायरिंग, पुलिस बनी तमाशबीन
हरिद्वार, उत्तराखंड।
यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि उत्तराखंड की धरती पर कानून-व्यवस्था की भयावह हकीकत का वीडियो है। हरिद्वार में कोर्ट में पेशी के लिए ले जाए जा रहे एक आरोपी पर दिनदहाड़े नकाबपोश बदमाशों ने बाइक पर सवार होकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं और मौके से फरार हो गए। हैरानी की बात यह रही कि पूरे घटनाक्रम के दौरान आरोपी के साथ मौजूद पुलिसकर्मी न सिर्फ मूकदर्शक बने रहे, बल्कि उनके हाथों में रायफल होने के बावजूद न तो जवाबी फायरिंग की गई और न ही बदमाशों का पीछा किया गया।
घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बदमाश बेखौफ होकर फायरिंग करते हैं और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद आराम से भाग निकलते हैं। इस घटना ने उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी को न्यायालय में पेशी के लिए पुलिस अभिरक्षा में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे नकाबपोश बदमाशों ने बाइक से अचानक हमला किया। फायरिंग इतनी बेधड़क थी कि आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने न तो स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और न ही तत्काल कार्रवाई करते हुए हमलावरों को पकड़ने की कोशिश की।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब पुलिसकर्मियों के पास सरकारी हथियार और प्रशिक्षण मौजूद था, तो बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या पुलिस को पहले से किसी हमले की आशंका नहीं थी? क्या आरोपी की सुरक्षा और आम जनता की जान को यूँ ही जोखिम में छोड़ दिया गया?
घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड में अपराधियों के बढ़ते मनोबल और पुलिस के कथित ढीले रवैये को उजागर कर दिया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन औपचारिक बयान देकर मामले की जांच की बात कह रहा है, लेकिन वायरल वीडियो ने सिस्टम की तैयारियों और दावों की पोल खोल दी है। सवाल अब सिर्फ एक आरोपी पर हुए हमले का नहीं, बल्कि यह है कि अगर अदालत ले जाए जा रहे कैदी भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
