आंगनबाड़ी कर्मियों को न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की मांग, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन।

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आंगनबाड़ी कर्मियों को न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की मांग, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन।

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आँगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सुशीला खत्री के नेतृत्व में देशभर की 27.34 लाख आंगनबाड़ी मानदेय कार्मिकों के हितों को लेकर माननीय प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन के समकक्ष मानदेय दिए जाने, मानदेय को महंगाई सूचकांक से जोड़ने तथा उन्हें नियमित कर्मचारी बनाए जाने हेतु ठोस नीति निर्धारण की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि आंगनबाड़ी कार्मिक नौनिहाल बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के माध्यम से देश के भविष्य का निर्माण कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका वर्तमान और भविष्य दोनों ही असुरक्षित हैं। इन्हें “स्वैच्छिक मानदेय कार्मिक” कहकर न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किया जा रहा है, जो सम्मानजनक जीवन के अधिकार के विपरीत है। संघ ने स्वैच्छिक मानदेय कार्मिक की परिभाषा को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि कार्य, समय और मानदेय में न्यायसंगत संतुलन स्थापित हो सके।

ज्ञापन में केंद्र सरकार द्वारा असंगठित श्रमिकों के लिए तय किए गए न्यूनतम वेतन का उल्लेख करते हुए मांग की गई है कि आंगनबाड़ी कार्मिकों को भी उनके अनुभव के आधार पर अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रेणी में रखते हुए उसी के अनुरूप मानदेय दिया जाए। इसमें यह भी बताया गया कि वर्ष 2019 के बाद महंगाई बढ़ने के बावजूद आंगनबाड़ी मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई, जबकि अन्य कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलता रहा। ऐसे में मानदेय को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ना न्यायोचित होगा।

संघ ने यह भी मांग रखी कि दो वर्ष तक की सेवा वाले कार्मिकों को अकुशल मानते हुए न्यूनतम वेतन दिया जाए, दो से पांच वर्ष तक अर्द्धकुशल, पांच से दस वर्ष तक कुशल और दस वर्ष से अधिक सेवा वाले कार्मिकों को उच्च कुशल श्रेणी में रखते हुए मानदेय तय किया जाए। गुजरात उच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्मिकों को सम्मानजनक वेतन दिया जाना संवैधानिक दृष्टि से भी उचित है।

नियमितीकरण के मुद्दे पर संघ ने कहा कि वर्ष 1975 से चली आ रही आंगनबाड़ी योजना के बावजूद आज तक कार्मिकों के भविष्य को सुरक्षित करने की कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग में नर्सरी टीचर, कनिष्ठ लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और महिला पर्यवेक्षक जैसे पदों पर आंगनबाड़ी कार्मिकों को प्राथमिकता व आरक्षण देकर नियमित सेवा में लाने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

इसके साथ ही ज्ञापन में सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये ग्रेच्युटी, वर्तमान मानदेय के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन तय करने और आंगनबाड़ी केंद्रों पर किसी अन्य प्रकार की नई भर्तियां न कर, कार्यरत आंगनबाड़ी कार्मिकों को ही प्रोत्साहित करने की मांग की गई है।