भ्रष्ट शिक्षा विभाग के चंगुल में फंसा ग्रीन्स वैली पब्लिक स्कूल: बच्चों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़!* *जिस रंगीन मिजाज गुरुजी के स्कूल को देना था बंद करने का आदेश, उसी मान्यता देने की फिराक में शिक्षा विभाग*

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*भ्रष्ट शिक्षा विभाग के चंगुल में फंसा ग्रीन्स वैली पब्लिक स्कूल: बच्चों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़!* *जिस रंगीन मिजाज गुरुजी के स्कूल को देना था बंद करने का आदेश, उसी मान्यता देने की फिराक में शिक्षा विभाग*

रिपोर्ट – महेंद्र पाल मौर्य। ” समाचार इंडिया 1″ उत्तराखंड, कुमाऊं, उधम सिंह नगर ,रूद्रपुर –

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर ट्रांजिट कैंप की कृष्णा कॉलोनी में स्थित ग्रीन्स वैली पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि इस स्कूल को पहले बंद करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन बाद में शिक्षा विभाग ने इसे मान्यता दे दी। यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

 

*स्कूल के प्रबंधक की विवादित छवि*

 

स्कूल के प्रबंधक केपी राठौर की विवादित छवि रही है। उन पर आरोप है कि वे रंगीन मिजाजी हैं और अभिभावकों और स्कूली बच्चों के साथ मारपीट करते हैं। इससे पहले भी वे कई विवादों में रह चुके हैं। उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गई हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। रंगीन मिजाजी के चक्कर में वे दो दिन हवालात की हवा भी खा चुके हैं।

 

*स्कूल की अवैधता और सुरक्षा के मुद्दे*

 

स्कूल नजूल की भूमि पर बना है और इसका नक्शा भी पास नहीं है। स्कूल के कोई भी मानक पूरे नहीं हैं। स्कूल घनी आबादी के बीच में है, जहां पर कोई एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुंच सकती है। अनहोनी पर बड़ी घटना हो सकती है और बच्चों की जान भी जा सकती है। स्कूल 12वीं तक की कक्षाएं संचालित कर रहा है, लेकिन इसके पास मान्यता नहीं है।

 

*अराजक माहौल और शिक्षिकाओं की सुरक्षा*

 

स्कूल में कम उम्र की छात्राएं भी पढ़ती हैं और प्रबंधक केपी राठौर का रवैया उनके प्रति बहुत ही गंदा है। इससे स्कूल का माहौल अराजक हो गया है और शिक्षिकाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा खतरे में है। अभिभावकों को चिंता है कि उनके बच्चों को ऐसे स्कूल में भेजना उनकी जिंदगी को खतरे में डालने जैसा है।

 

*शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल*

 

इस मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर क्यों स्कूल को बंद करने के आदेश दिए गए थे और बाद में मान्यता क्यों दे दी गई? कहीं न कहीं शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा है। क्या शिक्षा विभाग ने स्कूल की मान्यता देने से पहले आवश्यक जांच की थी? शिक्षा विभाग से कई बार फटकार लग चुकी है, लेकिन इसके बावजूद भी स्कूल की मान्यता को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लगता है शिक्षा विभाग के कर्मचारी अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।

 

*जांच की मांग*

 

अब इस मामले में जांच की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे इस मामले की जांच करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्कूल नियमों और मानकों का पालन कर रहे हैं। जांच से ही पता चल पाएगा कि स्कूल को मान्यता देने में क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।

 

*अभिभावकों की चिंता*

 

अभिभावकों की चिंता है कि अगर स्कूल के प्रबंधक की विवादित छवि है और स्कूल की सुरक्षा और मानक पूरे नहीं हैं, तो उनके बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? वे चाहते हैं कि शिक्षा विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करे और स्कूल की मान्यता रद्द करे। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को ऐसे स्कूल में नहीं भेजना चाहते जहां उनके साथ मारपीट की जा सकती है और उनकी जान जोखिम में हो सकती है।

 

*निष्कर्ष*

 

इस मामले में शिक्षा विभाग को जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी स्कूल नियमों और मानकों का पालन कर रहे हैं। अभिभावकों की चिंता को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग को सख्त कदम उठाने होंगे। अगर स्कूल के प्रबंधक के खिलाफ आरोप सही पाए जाते हैं, तो स्कूल की मान्यता रद्द की जानी चाहिए। शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को भी अपने काम के प्रति ईमानदार होना चाहिए और भ्रष्टाचार से बचना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग को कड़े कदम उठाने होंगे। इसके लिए विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लानी होगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी। तभी जाकर हम अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।