हिजाब हटाए जाने के बाद डॉ. नुसरत परवीन कोलकाता परिवार के पास, बिहार की सरकारी नौकरी ज्वॉइन करने से करती हैं इनकर। खबर संवाद – महेंद्र पाल मौर्य रुद्रपुर -बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 15 दिसंबर को पटना में आयोजित आयुष डॉक्टर नियुक्ति समारोह के दौरान एक महिला डॉक्टर डॉ. नुसरत परवीन का हिजाब हटाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर तीव्र विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में देखा गया कि जब नुसरत परवीन हिजाब पहने मंच पर नियुक्ति पत्र प्राप्त करने आईं, तो मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा “यह क्या है” और फिर खुद उनका हिजाब नीचे खींच दिया, जिससे वह स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं। इस घटना के समय डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मंच पर मौजूद थे और अधिकारियों ने तेजी से उन्हें वहां से हटाया। इस पूरी घटना की क्लिप विपक्षी दलों द्वारा साझा की गई और राजनीतिक तथा सामाजिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ी से सामने आईं।
घटना के तुरंत बाद नुसरत परवीन बिहार छोड़कर कोलकाता अपने परिवार के पास चली गईं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि 15 दिसंबर की घटना के अगले ही दिन नुसरत कोलकाता चली गईं और फिलहाल वे बिहार सरकार की नौकरी ज्वॉइन नहीं करेंगी। उनके परिजन उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह घटना उनकी गलती नहीं थी तथा उन्हें नौकरी ज्वॉइन करना चाहिए, लेकिन नुसरत परवीन स्वयं बिहार वापस आकर नौकरी ज्वॉइन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहीं। इस स्थिति में वह परिवार के समक्ष अपनी पढ़ाई जारी रखने और डॉक्टर बनने के अपने लंबे समय से चले आ रहे सपने के बारे में विचार कर रही हैं।
समारोह में कुल 1,283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र दिए जाने थे, जिनमें से 10 को सीएम के हाथों व्यक्तिगत रूप से पत्र सौंपे गए थे, और बाकी ऑनलाइन भेजे गए थे। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के रवैये पर सवाल उठाए हैं और कई ने इसे महिलाओं और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है, जबकि कुछ समर्थकों और सरकारी पक्ष के नेताओं ने इसे गलत तरीके से प्रचारित करने वाला बताया है।
इस पूरे विवाद ने न केवल राजनीतिक बहस छेड़ी है, बल्कि सामाजिक और मानवाधिकार समूहों की भी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। कई राजनीतिक नेताओं और समुदायों ने इस घटना की निंदा की है और मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की है।
