प्रीत विहार के अवैध कालोनाइजरों को किसका संरक्षण? सीलिंग की भूमि पर कटी कॉलोनियां, जिला मुख्यालय पर प्राधिकरण की चुप्पी से उठे गंभीर सवाल।

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प्रीत विहार के अवैध कालोनाइजरों को किसका संरक्षण?

सीलिंग की भूमि पर कटी कॉलोनियां, जिला मुख्यालय पर प्राधिकरण की चुप्पी से उठे गंभीर सवाल

रिपोर्ट- महेंद्र पाल मौर्य

रुद्रपुर।

जिलेभर में सीलिंग की भूमि और बिना नक्शा पास कराए काटी गई अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जिला विकास प्राधिकरण की लगातार कार्रवाई के दावों के बीच जिला मुख्यालय पर स्थित प्रीत विहार क्षेत्र में प्राधिकरण का दोहरा मापदंड अब खुलकर सामने आने लगा है। यहां सीलिंग की भूमि पर खुलेआम प्लॉटिंग और अवैध कॉलोनियों का विकास हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्राधिकरण की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस चुप्पी ने आम लोगों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रीत विहार के अवैध कालोनाइजरों को किसका संरक्षण प्राप्त है?

 

जिला विकास प्राधिकरण ने बीते कुछ महीनों में पूरे जिले में सख्त अभियान चलाते हुए 500 से अधिक अवैध कॉलोनियों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है। इन कॉलोनियों में पहले से बेचे जा चुके प्लॉटों की रजिस्ट्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके चलते हजारों प्लॉट खरीदार परेशान हैं और रोजाना रजिस्टार कार्यालय, प्राधिकरण और जिला प्रशासन के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई लोगों ने अपनी जीवन भर की पूंजी इन प्लॉटों में लगाई है, लेकिन अब वे असमंजस की स्थिति में फंसे हुए हैं।

 

हाल ही में गूलरभोज क्षेत्र में सरकारी और सीलिंग की भूमि पर अवैध प्लॉटिंग के मामले में प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया। वहां न केवल कब्जाधारियों को बेदखली के नोटिस जारी किए गए, बल्कि जमीन बेचने वाले भूमाफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भी भेजा गया। इस कार्रवाई से यह संदेश गया था कि जिला विकास प्राधिकरण अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है।

 

लेकिन इसके ठीक उलट तस्वीर जिला मुख्यालय पर स्थित प्रीत विहार में दिखाई दे रही है। यहां सीलिंग की पर्याप्त भूमि मौजूद होने के बावजूद नियमों और कानून को ताक पर रखकर अवैध रूप से कॉलोनियां काटी गई हैं। सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर प्लॉटिंग कर प्लॉट बेचे भी जा चुके हैं, बावजूद इसके प्राधिकरण द्वारा न तो नोटिस जारी किए गए हैं और न ही किसी प्रकार की सीलिंग या विधिक कार्रवाई सामने आई है।

 

स्थानीय लोगों में यह चर्चा जोरों पर है कि जब जिले के अन्य इलाकों में इतनी सख्ती बरती जा रही है, तो फिर प्रीत विहार में यह मेहरबानी क्यों? क्या यहां के कालोनाइजर प्रभावशाली हैं या उन्हें किसी स्तर पर राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि यह क्षेत्र जिला मुख्यालय में आता है और प्राधिकरण की नाक के नीचे यह सारा अवैध विकास हो रहा है।

 

लोगों का कहना है कि प्राधिकरण की यह उदासीनता न सिर्फ नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह उन हजारों नागरिकों के साथ भी अन्याय है, जिनके प्लॉट दूसरी जगहों पर होने के कारण कार्रवाई की जद में आ गए हैं। यदि कानून सबके लिए समान है, तो फिर प्रीत विहार में सीलिंग की भूमि पर हो रहे इस अवैध विकास पर अब तक चुप्पी क्यों?

 

प्रीत विहार में अवैध प्लॉटिंग और जिला विकास प्राधिकरण की खामोशी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि जिले में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई एकरूपता और पारदर्शिता के साथ नहीं हो रही। अब देखना यह होगा कि प्राधिकरण इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।