

50 मीटर सड़क खा गया लोक निर्माण विभाग , 2.01 करोड़ की ट्रांजिट कैंप रोड पर उठे गंभीर सवाल, 450 मीटर की जगह 50 मीटर कम निर्माण का आरोप; डीएम से जांच की मांग, आरटीआई से मांगी पूरी जानकारी

रुद्रपुर।
जनपद उधम सिंह नगर के रुद्रपुर स्थित ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में झील से चामुंडा देवी मंदिर रुद्रपुर तक व्हाइट टॉपिंग द्वारा किए जा रहे सड़क पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण कार्य को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राज्य योजना 2025–26 के अंतर्गत करीब ₹201.58 लाख (लगभग ₹2.01 करोड़) की लागत से 450 मीटर लंबाई में स्वीकृत इस सड़क निर्माण कार्य पर अनियमितता और अधूरे निर्माण के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर जिलाधिकारी से जांच की मांग के साथ-साथ सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
बताया जा रहा है कि ट्रांजिट कैंप निवासी विकास बंसल ने जिलाधिकारी, उधम सिंह नगर को शिकायत पत्र देकर इस सड़क निर्माण कार्य की तकनीकी एवं भौतिक जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि झील से चामुंडा देवी मंदिर तक मार्ग के पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण का कार्य स्वीकृत किया गया था, जिसकी लंबाई 450 मीटर दर्शाई गई है और स्थल पर इसका शिलापट्ट भी लगा हुआ है।
हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीनी स्तर पर निरीक्षण करने पर लगभग 50 मीटर सड़क निर्माण कार्य कम दिखाई देता है और पूरा मार्ग स्वीकृत सीमा तक निर्मित नहीं किया गया है। ऐसे में स्वीकृत बजट के मुकाबले वास्तविक निर्माण कार्य को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस कार्य के लिए करीब ₹2 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है, उसकी वास्तविक माप और कार्य की पारदर्शिता जनता के सामने स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराते हुए स्वीकृत डीपीआर, माप पुस्तिका (एमबी) और अन्य तकनीकी दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसी बीच इस सड़क निर्माण कार्य की पारदर्शिता को लेकर एक और कदम उठाया गया है। ट्रांजिट कैंप निवासी विक्की सोनकर ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत ऑनलाइन आवेदन देकर मुख्यमंत्री कार्यालय उत्तराखंड से इस परियोजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारी मांगी है।
आरटीआई आवेदन में परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की प्रति, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR), तकनीकी विनिर्देश, वास्तविक रूप से निर्मित सड़क की लंबाई, भुगतान का पूरा विवरण और कार्य करने वाली एजेंसी या ठेकेदार का नाम उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा कार्य की माप पुस्तिका (Measurement Book – MB) की प्रमाणित प्रति भी मांगी गई है, जिसमें निर्माण कार्य का वास्तविक माप दर्ज होता है।
आरटीआई में यह भी स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि यदि स्वीकृत 450 मीटर के मुकाबले कम दूरी में सड़क का निर्माण हुआ है तो इसके पीछे क्या कारण है और इसके लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच और तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट की प्रतियां भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
सूत्रों के अनुसार यह आरटीआई आवेदन आगे चलकर लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड या संबंधित कार्यदायी संस्था को स्थानांतरित किया जा सकता है, जहां से सड़क निर्माण कार्य का पूरा तकनीकी और वित्तीय विवरण सामने आएगा। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विभाग को 30 दिनों के भीतर जवाब देना अनिवार्य होता है।
ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क क्षेत्र की महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है और इसके निर्माण में पारदर्शिता होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह कार्य सार्वजनिक धन से किया जा रहा विकास कार्य है और इसका सीधा असर स्थानीय नागरिकों तथा व्यापारियों पर पड़ता है।
अब इस पूरे मामले में सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायत और आरटीआई के बाद ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में हुए इस सड़क निर्माण कार्य की जांच कब और किस स्तर पर शुरू होती है। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और बड़े स्तर की जांच तक भी पहुंच सकता है।
