उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ़ पप्पू की एंट्री से बरेली की राजनीति में होने वाला है बड़ा धमाका, बहेड़ी में पत्नी वैजयंती माला को उतार भाजपा को दिखा चुके हैं हार का आईना बिथरी से ताल ठोकने की तैयारी, आज सभा के जरिए शक्ति प्रदर्शन; डॉ. राघवेन्द्र की सीट पर बढ़ी सियासी सरगर्मी, पप्पू भरतौल भी फिर दावेदार।

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उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ़ पप्पू की एंट्री से बरेली की राजनीति में होने वाला है बड़ा धमाका, बहेड़ी में पत्नी वैजयंती माला को उतार भाजपा को दिखा चुके हैं हार का आईना


बिथरी से ताल ठोकने की तैयारी, आज सभा के जरिए शक्ति प्रदर्शन; डॉ. राघवेन्द्र की सीट पर बढ़ी सियासी सरगर्मी, पप्पू भरतौल भी फिर दावेदार।

बरेली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही बरेली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इस बार सियासी पारा चढ़ाने का काम किया है गिरधारी लाल साहू उर्फ़ पप्पू ने, जिनकी एंट्री ने बिथरी चैनपुर सीट को एक बार फिर हाई प्रोफाइल बना दिया है। उत्तराखंड की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति होने के चलते पहले से ही प्रभावशाली माने जाने वाले गिरधारी पप्पू अब दोबारा सक्रिय होकर चुनावी मैदान में उतरने का संकेत दे चुके हैं, जिससे बरेली के साथ-साथ उत्तराखंड की सियासत में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है।

गिरधारी पप्पू की इस सियासी वापसी का पहला बड़ा संकेत उनके बेटे रिंकू साहू द्वारा 5 अप्रैल को पीलीभीत रोड स्थित दिशा गार्डन में बुलाई गई सभा से मिला है, जिसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। इस सभा के जरिए पप्पू अपने समर्थकों की ताकत दिखाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि वे इस बार पूरी तैयारी के साथ चुनावी जंग में उतरेंगे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि वे किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन उनके मैदान में उतरने की खबर मात्र से ही भाजपा सहित अन्य दलों के अंदर हलचल तेज हो गई है और दावेदारों की रणनीतियां बदलने लगी हैं।

गिरधारी पप्पू का राजनीतिक सफर हमेशा सुर्खियों और विवादों से घिरा रहा है। जोगी नवादा से सभासद रहने से लेकर मेयर चुनाव में दमदार दावेदारी तक, उन्होंने हर स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। उनके खिलाफ समय-समय पर आपराधिक मामलों और बयानों को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं, लेकिन हर बार उन्होंने इन चुनौतियों को पार करते हुए खुद को सियासत में प्रासंगिक बनाए रखा है। यही कारण है कि जहां उनके समर्थक उन्हें जुझारू नेता मानते हैं, वहीं विरोधी उनके पुराने विवादों को मुद्दा बनाकर घेरने की तैयारी में हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले उनकी दिवंगत पत्नी वैजयंती माला साहू को बहेड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाकर उन्होंने भाजपा को हार का सामना कराया था, जिससे यह साफ हो गया था कि पप्पू फैक्टर चुनावी समीकरणों को उलटने की क्षमता रखता है। अब जब वह खुद मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं तो बिथरी चैनपुर सीट पर इसका असर और भी व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

बिथरी चैनपुर सीट पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील और चर्चित रही है। यहां मौजूदा विधायक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा हैं, जिन्हें पप्पू भरतौल का टिकट काटकर मैदान में उतारा गया था और उन्होंने जीत हासिल की थी। अब एक बार फिर पप्पू भरतौल टिकट की दौड़ में हैं, जबकि कई अन्य ओबीसी चेहरे भी लखनऊ और दिल्ली में सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में गिरधारी पप्पू की एंट्री ने मुकाबले को और भी त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है।

इस क्षेत्र में राठौर और साहू वोट बैंक की अच्छी खासी मौजूदगी, साथ ही गिरधारी पप्पू के संसाधन और नेटवर्क उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। यही वजह है कि उनकी सक्रियता से न सिर्फ सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं बल्कि गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान भी तेज होती नजर आ रही है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि गिरधारी पप्पू किस पार्टी का दामन थामते हैं और उनकी सभा में कितना जनसमर्थन उमड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि उनकी एंट्री ने बरेली खासकर बिथरी चैनपुर की राजनीति में बड़ा धमाका कर दिया है और आने वाले दिनों में यहां का चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और टकरावपूर्ण होने वाला है।