*उत्तराखंड में बेलगाम अफसरशाही: मंत्री और डीएम के बीच तनातनी*
उत्तराखंड में अफसरशाही का एक और प्रकरण सामने आया है, जिसमें मंत्री गणेश जोशी और डीएम सविन बंसल आमने-सामने हो गए। यह घटना उस समय की है जब मंत्री जी ने डीएम को कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
*मंत्री ने डीएम को सुनाई खरी-खोटी*
मंत्री गणेश जोशी ने डीएम सविन बंसल को कहा कि उन्होंने तीन-चार बार फोन किया, लेकिन आपने फोन नहीं उठाया। डीएम ने जवाब दिया कि वह कई जगह दिक्कतें थीं, इसलिए फोन नहीं उठा पाए। मंत्री ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी ने फोन उठा लिया, विनय शंकर ने फोन उठा लिया, एसडीएम ने फोन उठा लिया, लेकिन तुमने तब फोन उठाया जब मैंने सीएम को फोन किया।
*डीएम का रवैया हैरान करने वाला*
डीएम सविन बंसल का रवैया हैरान करने वाला है। उन्होंने मंत्री की अनदेखी की, जो न केवल मंत्री के लिए अपमानजनक है, बल्कि उन सब लोगों के लिए भी जो मंत्री का प्रतिनिधित्व करते हैं।
*आपदा के समय में इगो दिखाना गलत*
यह आपदा का समय है, इगो दिखाने का नहीं। यह साथ काम करने का समय है। जब विपक्ष और भाजपा कार्यकर्ताओं से लेकर विधायक और मंत्री तक “सूट-बूट वालों” के रवैए से खुद को पीड़ित बता रहे हैं, तो सोचो ऐसे अधिकारियों से आम जनता कितनी परेशान होती होगी।
*अफसरशाही का असली चेहरा*
एक बिना नेम प्लेट वाला पुलिस अधिकारी यहाँ तक कहता है कि हम उत्तर प्रदेश के हैं, हमें उत्तराखंड से क्या लेना-देना। यही है हावी होती अफसरशाही का असली चेहरा। इन अधिकारियों पर दिल्ली-मुंबई के बड़े नेताओं का हाथ रहता है, इसलिए ये लोग इस तरह उत्तराखंड की जनता को सताते हैं।
*क्षेत्रीय दल की सरकार बनाने की आवश्यकता*
यही कारण है कि हम कहते हैं कि उत्तराखंड में क्षेत्रीय दल की सरकार बनाओ, ताकि ये नौकरशाह नौकरी करें, राजनीति नहीं। उत्तराखंड की जनता को अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा और क्षेत्रीय दल की सरकार बनाने के लिए एकजुट होना होगा।
*निष्कर्ष*
उत्तराखंड में अफसरशाही का यह प्रकरण एक बार फिर से दिखाता है कि कैसे अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और जनता के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। यह समय है कि उत्तराखंड की जनता अपने अधिकारों के लिए लड़ें और क्षेत्रीय दल की सरकार बनाने के लिए एकजुट हों।
