

शहादत दिवस पर रुद्रपुर में गूंजे इंकलाबी नारे, श्रम संहिताओं और ‘साम्राज्यवादी युद्ध’ के खिलाफ मजदूरों का प्रदर्शन। 


रुद्रपुर, 23 मार्च 2026।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु के शहादत दिवस पर रुद्रपुर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले एक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांधी पार्क में सभा के बाद कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर भगत सिंह चौक पहुंचकर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
सभा में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है और उन्हें पूंजी के हित में “बंधुआ” बनाने की कोशिश हो रही है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) के क्रांतिकारी विचारों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश शासन के दमनकारी कानूनों के खिलाफ संसद में बम फेंककर “बहरे कानों तक आवाज” पहुंचाने का प्रयास किया था।
सभा में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा कथित दबाव और युद्ध की स्थिति की आलोचना करते हुए इसे साम्राज्यवादी हस्तक्षेप बताया। साथ ही वेनेजुएला के संदर्भ में भी वैश्विक राजनीति पर सवाल उठाए गए।
वक्ताओं ने कहा कि उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों के चलते देश में मजदूर वर्ग पर दबाव बढ़ा है। रोजगार असुरक्षा, महंगाई और सामाजिक सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों को गंभीर बताया गया।
सभा में यह भी कहा गया कि भगत सिंह के विचार साम्प्रदायिकता और जातिवाद के खिलाफ थे तथा वैज्ञानिक सोच और तर्क पर आधारित समाज की वकालत करते थे। वर्तमान समय में इन विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।
कार्यक्रम के अंत में श्रम संहिताओं को रद्द करने और मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया।
सभा को विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया, जबकि संचालन मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी और महासचिव चंद्र मोहन लखेड़ा ने किया। बड़ी संख्या में श्रमिक और सामाजिक कार्यकर्ता कार्यक्रम में मौजूद रहे।
